महिलाओं की सेहत से जुड़ी बड़ी चेतावनी: ओवेरियन कैंसर को न करें नजरअंदाज।

ओवेरियन कैंसर: महिलाओं की खामोश दुश्मन बीमारी, समय रहते पहचानना है जरूरी। पेट दर्द या सूजन को हल्के में न लें, हो सकता है ओवेरियन कैंसर का संकेत। हर महिला को जानना चाहिए ओवेरियन कैंसर के शुरुआती लक्षण। ओवेरियन कैंसर की अनदेखी पड़ सकती है भारी, जागरूकता ही बचाव। महिलाओं की सेहत से जुड़ी बड़ी चेतावनी: ओवेरियन कैंसर को न करें नजरअंदाज। देर से पहचान बन सकती है खतरा, ओवेरियन कैंसर पर समय रहते ध्यान दें। ओवेरियन कैंसर: शरीर के छोटे संकेत भी हो सकते हैं बड़े खतरे की घंटी। महिलाओं के लिए जरूरी खबर: ओवेरियन कैंसर के लक्षण पहचानें, जीवन बचाएं। खामोशी से बढ़ता ओवेरियन कैंसर, जागरूक रहना है बेहद जरूरी। ओवेरियन कैंसर से बचाव का पहला कदम — समय पर जांच और सही जानकारी।

May 10, 2026 - 15:46
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महिलाओं की सेहत से जुड़ी बड़ी चेतावनी: ओवेरियन कैंसर को न करें नजरअंदाज।

महिलाओं की सेहत से जुड़ी बड़ी चेतावनी: ओवेरियन कैंसर को न करे नजरअंदाज।

महिलाओं के लिए जानना क्यो है जरूरी।

मुज़फ्फरनगर: ओवेरियन कैंसर भारतीय महिलाओं में होने वाले सबसे आम कैंसरों में तीसरे स्थान पर आता है। इसकी सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती चरण में इसके लक्षण बेहद सामान्य ओर अस्पष्ट होते है। जिसके कारण अधिकाँश महिलाएं इसे गैस,पेट की समस्या या हार्मोनल बदलाव समझकर नजरअंदाज कर देती है।यही वजह है कि अधिकतर मरीजो में यह बीमारी एडवांस स्टेज में जाकर सामने आती है।

ओवेरियन कैंसर को अक्सर " साइलेंट थ्रेट" कहा जाता है, क्योकि इसकी शुरुआत बहुत धीमी ओर बिना स्पष्ट संकेतो के होती है। लगातार पेट फूलना, पेल्विक या पेट के निचले हिस्से में दर्द, थोड़ा खाने पर ही पेट भर जाना, बार बार पेशाब आने की समस्या, अचानक वजन बढ़ना या कम होना जैसे लक्षण इसके संकेत हो सकते है। चूंकि ये समस्याए सामान्य गेस्ट्रिक या मासिक धर्म संबंधी दिक्कतों जैसी लगती है, इसलिए सही जांच में देरी हो जाती है। 

मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, नोएडा के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग की प्रिंसिपल कंसल्टेंट डॉ.प्रेक्षी चौधरी ने बताया यह बीमारी खासतौर पर 50 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं में ज्यादा देखी जाती है। जिन महिलाओं के परिवार में ओवेरियन,ब्रेस्ट या कोलोरेक्टल कैंसर का इतिहास रहा हो, उनमे इसका खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा बांझपन कभी गर्भधारण न होना,मोटापा, हॉर्मोनल कारण ओर BRCA जैसे जेनेटिक म्यूटेशन भी जोखिम बढ़ाने वाले महत्वपूर्ण कारण है। ओवेरियन कैंसर के इलाज में पिछले कुछ वर्षों में काफी प्रगति हुई है। अब इलाज केवल सर्जरी और सामान्य कीमोथेरेपी तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रिसिशन मेडिसिन और टार्गेटेड थेरेपी ने उपचार को अधिक प्रभावी बनाया है। मरीज की स्थिति, कैंसर के स्टेज और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए इलाज की योजना तैयार की जाती है। डीबल्किगसी या साइटो रिडक्टिव सर्जरी के जरिए शरीर से अधिकतम ट्यूमर निकालने की कोशिश की जाती है, जिससे आगे का इलाज बेहतर परिणाम दे सके।"

डॉ.प्रेक्षी  ने आगे बताया "सर्जरी के साथ प्लैटिनम आधारित कीमोथेरेपी का इस्तेमाल अक्सर किया जाता है।वही PARP inhibitors जैसी नई टार्गेटेड दवाओं ने खासकर BRCA  म्यूटेशन वाले मरीजों में अच्छे परिणाम दिखाएं हैं। एडवांस स्टेज के मरीजों में HIPEC यानी हाइपरथर्मिक इंट्रापेरीटोनियल कीमोथेरेपी जीवन की गुणवत्ता और सर्वाइवल दोनों को बेहतर बनाने में मददगार साबित हो रही है। वहीं जिन महिलाओं की भविष्य में मां बनने की इच्छा होती है, उनके लिए फर्टिलिटी स्पेरिंग सर्जरी (FSS) जैसे विकल्प भी उपलब्ध हैं। वर्तमान में इम्यूनोथेरेपी और इंट्रापेरीटोनियल कीमोथेरेपी पर कई क्लिनिकल ट्रायल चल रहे हैं, जो एडवांस या दोबारा लौटने वाले ओवेरियन कैंसर के मरीजों के लिए नई उम्मीद बनकर उभर रहे हैं"।

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