लावारिसों की वारिस बनीं क्रांतिकारी शालू सैनी, 6000 बेसहारा शवों को दे चुकीं मुखाग्नि, उत्तराखंड में हुआ सम्मान
सम्मान समारोह के दौरान जैसे ही उनकी सेवा यात्रा का जिक्र हुआ, माहौल भावुक हो उठा। बताया गया कि कोरोना महामारी और लॉकडाउन के उस भयावह दौर में, जब लोग अपने सगे संबंधियों से भी दूरी बना रहे थे, तब शालू सैनी ने अपनी जान की परवाह किए बिना अस्पतालों, सड़कों और श्मशानों में पड़े लावारिस शवों को सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई दी।
लावारिसों की वारिस बनी क्रांतिकारी शालू सैनी 6000 बेसहारा शवो को दे चुकी मुखाग्नि, उत्तराखंड में हुआ सम्मान।
आरिफ राणा
मुजफ्फरनगर: इंसानियत की मिसाल बन चुकी समाज सेवी क्रांतिकारी शालू सैनी को उत्तराखंड में उनकी निस्वार्थ सेवा भावना के लिए सम्मानित किया गया। रुड़की स्थित उत्तराखंड के गन्ना मंत्री श्यामवीर सैनी के आवास पर उन्हें शॉल ओढाकर सम्मानित किया गया। पिछले 7 वर्षों में करीब 6000 लावारिस और बेसहारा शवो का पूरे विधि विधान से अंतिम संस्कार कर चुकी शालू सैनी आज "लावारिसों की वारिस" के नाम से देश भर में पहचान बना चुकी है।
सम्मान समारोह के दौरान जैसे ही उनकी सेवा यात्रा का जिक्र हुआ, माहौल भावुक हो उठा। बताया गया कि कोरोना महामारी और लॉकडाउन के उस भयावह दौर में जब लोग अपने सगे संबंधियों से भी दूरी बना रहे थे, तब शालू सैनी ने अपनी जान की परवाह किए बिना अस्पतालों, सड़कों और श्मशानों में पड़े लावारिस शवो को सम्मान पूर्वक अंतिम विदाई दी।
माताओ के लिए बनाया आशियाना
शालू सैनी की सेवा केवल अंतिम संस्कार तक सीमित नहीं रही। समाज द्वारा ठुकराई गई बेसहारा और बुजर्ग माताओ के लिए भी उन्होंने सहारा बनने का काम किया।
बेटी की शादी के लिए खरीदे गए मात्र 80 गज के प्लाट पर उन्होंने वृद्धाश्रम जैसा आशियाना तैयार किया। जहां कई बुजुर्ग महिलाएं आज सुरक्षित जीवन बिता रही हैं,वहां रहने वाली महिलाएं उन्हें बेटी कहकर पुकारती है।
मानवता करुणा और निस्वार्थ सेवा के इस अद्भुत कार्य ने शालू सैनी को केवल मुजफ्फरनगर ही नहीं, बल्कि प्रदेश, देश और विदेश तक अलग पहचान दिलाई है। लोग उन्हें अब उनके नाम से कम और "लावारिसों की वारिस" के नाम से ज्यादा जानते हैं।
सम्मान समारोह में मौजूद लोगों ने कहा कि आज के दौर में जहां रिश्ते भी स्वार्थ के तराजू पर तौले जा रहे हैं, वहा शालु सैनी जैसी महिलाएं मानवता को जिंदा रखने का काम कर रही है। उनका जीवन समाज के लिए प्रेरणा और सेवा का जीवंत उदाहरण बन चुका है।
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